“We are what we think...”

20+ years of reflections ✨

The Archive

A journey through thoughts from 2004 to 2025

Oct 28, 2009

thought

कुछ एहसास शब्द में ढलने को, पर अटके है

Oct 23, 2009

Incomplete

इतनी भीड़ में भी है तनहाई
इतनी आवाज़ में भी है खोमाशी
कितनी रहे है पर मंजिल फ़िर भी नही
सब है उन्ही रहो के रही पर हमसफ़र नही
चहरे कितने पर आखों में वो अपनापन नही
दोस्त कितने है पर शुब्चिन्तक नही