“We are what we think...”

20+ years of reflections ✨

The Archive

A journey through thoughts from 2004 to 2025

Apr 15, 2013

राही

राही  


हर मोड़ पर मिलते है कुछ अपने
आखो मे लेकर कितने सपने
हलके कदम और सहमे से हम
ढूंढते है वो साये
जिनके थामे हाथ और समझे जस्बात
किसी ने दी कुशी और किसी ने हसी
और कभी मुश्किलों से मिली प्ररणा नयी
नहीं ज़रूरी की हेर ख्वाइश हो पूरी
और थोड़ी बुँदे अखो से छलकाए कुशी कभी